पुरुष बांझ कब बनते हैं?HealthPlanet

Posted on Wed 8th Feb 2023 : 08:55

पुरुष प्रजनन क्षमता आमतौर पर 40 से 45 साल की उम्र में कम होने लगती है जब शुक्राणु की गुणवत्ता कम हो जाती है। पुरुष की उम्र बढ़ने से गर्भावस्था की समग्र संभावना कम हो जाती है और गर्भावस्था के लिए समय बढ़ जाता है (गर्भवती होने के लिए मासिक धर्म चक्रों की संख्या) और गर्भपात और भ्रूण की मृत्यु का खतरा।

जब पुरुष एक साल या उससे अधिक समय तक यौन संबंध बनाने के बाद भी महिला को गर्भधारण करने में असफल होता है तो उसे पुरुष बांझपन कहा जाता है। पुरुष के स्पर्म की संख्या कम और गुणवत्ता खराब होने कारण स्पर्म महिला के अंडो को फर्टिलाइज नहीं कर पाता है जिसके कारण महिला को गर्भधारण करने में दिक्कतें आती हैं।



पुरुष बांझपन का कारण -

पुरुष बांझपन कई कारणों से होता है। अगर इन कारणों पर ध्यान देकर कुछ सावधानियां बरती जाएं तो बांझपन के खतरे को काफी हद तक कम या खत्म किया जा सकता है।

पुरुष बांझपन यानी मेल इनफर्टिलिटी के कारणों में निम्न शामिल हो सकते हैं:-

शुक्राणु की कम संख्या

पुरुष बांझपन के मुख्य कारणों में शुक्राणु की संख्या कम और क्वालिटी खराब होना शामली हैं। स्पर्म में शुक्राणु यानी सीमेन की संख्या कम होने पर यह महिला के अंडा को फर्टिलाइज नहीं कर पाता है।

जन्मजात असामान्यताएं

अनेक जन्मजात समस्याएं जैसे कि वास-डेफेरेंस आदि भी पुरुष में बांझपन का कारण बन सकते हैं। वास-डेफेरेंस एक ऐसी स्थिति है जिसके द्वारा शुक्राणु अंडकोष से बाहर निकलते हैं। इस स्थिति से पीड़ित होने पर वीर्य के स्खलन होने में समस्या होती है।

एंडोक्राइन असामान्यताएं

एंडोक्राइन सिस्टम में कई ग्रंथियां मौजूद होती हैं जो शरीर में अनेक मुख्य हार्मोन के उत्पादन को कंट्रोल करती हैं। जब किसी कारण एंडोक्राइन सिस्टम में असामान्यताएं पैदा होती हैं तो बांझपन की समस्या हो सकती है।

आनुवंशिक असामान्यताएं

आनुवंशिक असामान्यताओं के कारण क्रोमोजोम में किसी तरह का परिवर्तन होने पर शुक्राणु के उत्पादन और प्रवाह में रुकावट पैदा हो सकती है जो बांझपन का कारण बन सकता है।

शुक्राणु की गति

शुक्राणु की गतिलशीलता ठीक नहीं होने पर यह महिला के अंडे को फर्टिलाइज (निषेचित) नहीं कर पाता है जिसके कारण गर्भधारण में समस्या पैदा होती है।

वैरीकोसेल

यह एक गंभीर स्थिति है जिससे पीड़ित पुरुष के अंडकोष की नसों में सूजन आ जाती है। वैरीकोसेल स्पर्म के उतप्दान और गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित करता है। वैरीकोसेल पुरुष में बांझपन के मुख्य कारणों में से एक है।

संक्रमण

पुरुष के गुप्तांगों में संक्रमण होने पर बांझपन का खतरा बढ़ सकता है। कुछ संक्रमण ऐसे होते हैं जो शुक्राणु के निर्माण में बाधा पैदा करते हैं और शुक्राणु की नली को बंद कर देते हैं।

यौन संचारित संक्रमण जैसे कि क्लैमाइडिया और गोनोरिया के कारण शुक्राणु की संख्या में कमी आ सकती है। शुक्राणु की संख्या कम होने पर गर्भधारण की संभावना कम होती है।

तनाव

तनाव पुरुष और महिला दोनों की प्रजनन क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करता है। जो पुरुष लंबे समय तक तनाव से ग्रसित होते हैं उनके स्पर्म की संख्या और गुणवत्ता में कमी आती है। नतीजतन, बांझपन का खतरा बढ़ जाता है।

सिगरेट और शराब

सिगरेट और शराब का सेवन भी पुरुष बांझपन के खतरे को बढ़ाता है। नशीले पदार्थों का सेवन स्पर्म की संख्या और गुणवत्ता पर बुरा असर डालता है।

मोटापा

मोटापा भी पुरुष बांझपन के कारणों में से एक है। वजन जरूरत से अधिक होने पर हार्मोन में बदलाव आता है जिसके कारण बांझपन की समस्या पैदा हो सकती है।

इन सबके अलावा, दूसरे भी ऐसे अनेक कारक हैं जो पुरुष की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करते हैं। इसमें वृषण का अधिक गर्म होना, ट्यूमर होना और रेडिएशन के संपर्क में आना आदि शामिल हैं।

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