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पà¥à¤°à¥à¤· पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ आमतौर पर 40 से 45 साल की उमà¥à¤° में कम होने लगती है जब शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ की गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ कम हो जाती है। पà¥à¤°à¥à¤· की उमà¥à¤° बढ़ने से गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की समगà¥à¤° संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ कम हो जाती है और गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के लिठसमय बढ़ जाता है (गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ होने के लिठमासिक धरà¥à¤® चकà¥à¤°à¥‹à¤‚ की संखà¥à¤¯à¤¾) और गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ और à¤à¥à¤°à¥‚ण की मृतà¥à¤¯à¥ का खतरा।
जब पà¥à¤°à¥à¤· à¤à¤• साल या उससे अधिक समय तक यौन संबंध बनाने के बाद à¤à¥€ महिला को गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ करने में असफल होता है तो उसे पà¥à¤°à¥à¤· बांà¤à¤ªà¤¨ कहा जाता है। पà¥à¤°à¥à¤· के सà¥à¤ªà¤°à¥à¤® की संखà¥à¤¯à¤¾ कम और गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ खराब होने कारण सà¥à¤ªà¤°à¥à¤® महिला के अंडो को फरà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤œ नहीं कर पाता है जिसके कारण महिला को गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ करने में दिकà¥à¤•तें आती हैं।
पà¥à¤°à¥à¤· बांà¤à¤ªà¤¨ का कारण -
पà¥à¤°à¥à¤· बांà¤à¤ªà¤¨ कई कारणों से होता है। अगर इन कारणों पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देकर कà¥à¤› सावधानियां बरती जाà¤à¤‚ तो बांà¤à¤ªà¤¨ के खतरे को काफी हद तक कम या खतà¥à¤® किया जा सकता है।
पà¥à¤°à¥à¤· बांà¤à¤ªà¤¨ यानी मेल इनफरà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ के कारणों में निमà¥à¤¨ शामिल हो सकते हैं:-
शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ की कम संखà¥à¤¯à¤¾
पà¥à¤°à¥à¤· बांà¤à¤ªà¤¨ के मà¥à¤–à¥à¤¯ कारणों में शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ की संखà¥à¤¯à¤¾ कम और कà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ खराब होना शामली हैं। सà¥à¤ªà¤°à¥à¤® में शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ यानी सीमेन की संखà¥à¤¯à¤¾ कम होने पर यह महिला के अंडा को फरà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤œ नहीं कर पाता है।
जनà¥à¤®à¤œà¤¾à¤¤ असामानà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤à¤‚
अनेक जनà¥à¤®à¤œà¤¾à¤¤ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ जैसे कि वास-डेफेरेंस आदि à¤à¥€ पà¥à¤°à¥à¤· में बांà¤à¤ªà¤¨ का कारण बन सकते हैं। वास-डेफेरेंस à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है जिसके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ अंडकोष से बाहर निकलते हैं। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ से पीड़ित होने पर वीरà¥à¤¯ के सà¥à¤–लन होने में समसà¥à¤¯à¤¾ होती है।
à¤à¤‚डोकà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¨ असामानà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤à¤‚
à¤à¤‚डोकà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¨ सिसà¥à¤Ÿà¤® में कई गà¥à¤°à¤‚थियां मौजूद होती हैं जो शरीर में अनेक मà¥à¤–à¥à¤¯ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ को कंटà¥à¤°à¥‹à¤² करती हैं। जब किसी कारण à¤à¤‚डोकà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¨ सिसà¥à¤Ÿà¤® में असामानà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤à¤‚ पैदा होती हैं तो बांà¤à¤ªà¤¨ की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
आनà¥à¤µà¤‚शिक असामानà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤à¤‚
आनà¥à¤µà¤‚शिक असामानà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं के कारण कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤œà¥‹à¤® में किसी तरह का परिवरà¥à¤¤à¤¨ होने पर शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ और पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ में रà¥à¤•ावट पैदा हो सकती है जो बांà¤à¤ªà¤¨ का कारण बन सकता है।
शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ की गति
शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ की गतिलशीलता ठीक नहीं होने पर यह महिला के अंडे को फरà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤¾à¤‡à¤œ (निषेचित) नहीं कर पाता है जिसके कारण गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ में समसà¥à¤¯à¤¾ पैदा होती है।
वैरीकोसेल
यह à¤à¤• गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है जिससे पीड़ित पà¥à¤°à¥à¤· के अंडकोष की नसों में सूजन आ जाती है। वैरीकोसेल सà¥à¤ªà¤°à¥à¤® के उतपà¥à¤¦à¤¾à¤¨ और गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ को बà¥à¤°à¥€ तरह पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। वैरीकोसेल पà¥à¤°à¥à¤· में बांà¤à¤ªà¤¨ के मà¥à¤–à¥à¤¯ कारणों में से à¤à¤• है।
संकà¥à¤°à¤®à¤£
पà¥à¤°à¥à¤· के गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾à¤‚गों में संकà¥à¤°à¤®à¤£ होने पर बांà¤à¤ªà¤¨ का खतरा बॠसकता है। कà¥à¤› संकà¥à¤°à¤®à¤£ à¤à¤¸à¥‡ होते हैं जो शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ में बाधा पैदा करते हैं और शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ की नली को बंद कर देते हैं।
यौन संचारित संकà¥à¤°à¤®à¤£ जैसे कि कà¥à¤²à¥ˆà¤®à¤¾à¤‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾ और गोनोरिया के कारण शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ की संखà¥à¤¯à¤¾ में कमी आ सकती है। शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ की संखà¥à¤¯à¤¾ कम होने पर गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ कम होती है।
तनाव
तनाव पà¥à¤°à¥à¤· और महिला दोनों की पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को बà¥à¤°à¥€ तरह पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। जो पà¥à¤°à¥à¤· लंबे समय तक तनाव से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ होते हैं उनके सà¥à¤ªà¤°à¥à¤® की संखà¥à¤¯à¤¾ और गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ में कमी आती है। नतीजतन, बांà¤à¤ªà¤¨ का खतरा बॠजाता है।
सिगरेट और शराब
सिगरेट और शराब का सेवन à¤à¥€ पà¥à¤°à¥à¤· बांà¤à¤ªà¤¨ के खतरे को बà¥à¤¾à¤¤à¤¾ है। नशीले पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का सेवन सà¥à¤ªà¤°à¥à¤® की संखà¥à¤¯à¤¾ और गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ पर बà¥à¤°à¤¾ असर डालता है।
मोटापा
मोटापा à¤à¥€ पà¥à¤°à¥à¤· बांà¤à¤ªà¤¨ के कारणों में से à¤à¤• है। वजन जरूरत से अधिक होने पर हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ में बदलाव आता है जिसके कारण बांà¤à¤ªà¤¨ की समसà¥à¤¯à¤¾ पैदा हो सकती है।
इन सबके अलावा, दूसरे à¤à¥€ à¤à¤¸à¥‡ अनेक कारक हैं जो पà¥à¤°à¥à¤· की पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करते हैं। इसमें वृषण का अधिक गरà¥à¤® होना, टà¥à¤¯à¥‚मर होना और रेडिà¤à¤¶à¤¨ के संपरà¥à¤• में आना आदि शामिल हैं।
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